
बोधगया, 28 जुलाई:
मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग में मंगलवार को पीएचडी कोर्सवर्क (सत्र 2022–23) के शोधार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने शोधार्थियों से कहा कि शोध केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य समाज और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान तलाशना भी होना चाहिए।
सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी, कुलसचिव डॉ. बी. के. मंगलम, प्रॉक्टर डॉ. के. डी. वर्मा, भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) बासुदेव प्रसाद, सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. राणा प्रताप और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उपेन्द्र कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत चांदनी बसोया और उनकी टीम ने “वंदे मातरम्” और विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति से की। इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ, पौधा और शॉल भेंट कर स्वागत किया गया।
स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) बासुदेव प्रसाद ने कहा कि पीएचडी कोर्सवर्क शोधार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक दृष्टिकोण और शोध के प्रति गंभीरता विकसित करने का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने कहा कि भूगोल ऐसा विषय है, जो समाज, पर्यावरण और विकास के बीच संबंधों को समझने में अहम भूमिका निभाता है।

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने शोधार्थियों को नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लेने और आधुनिक शोध तकनीकों की जानकारी हासिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शोधपत्र लेखन, डेटा विश्लेषण, संदर्भ प्रबंधन और अकादमिक प्रस्तुतीकरण जैसे कौशल आज के समय में हर शोधार्थी के लिए जरूरी हैं।
कुलसचिव डॉ. बी. के. मंगलम ने कहा कि बदलते पर्यावरण और मानव जीवन को समझने में भौगोलिक अनुसंधान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने शोध कार्य में सही डेटा, विश्वसनीय संदर्भ और शोध नैतिकता के पालन को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
विशेष आमंत्रित प्रो. राणा प्रताप ने कहा कि अच्छा शोध केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। इसके लिए फील्डवर्क, प्रत्यक्ष अवलोकन, स्थानीय लोगों से संवाद और तथ्यों का गहराई से विश्लेषण करना भी उतना ही जरूरी है।
प्रॉक्टर डॉ. के. डी. वर्मा ने शोध में अनुशासन और शोध निदेशकों के नियमित मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उपेन्द्र कुमार ने विभाग की शैक्षणिक परंपरा और यहां उपलब्ध पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन, कंप्यूटर लैब, जीआईएस तथा रिमोट सेंसिंग जैसी सुविधाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान चांदनी बसोया और उनकी टीम ने एक भजन भी प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
अंत में डॉ. मीनाक्षी प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि मंच संचालन डॉ. पिंटू कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. नीरज कुमार सिंह, डॉ. लखभद्र सिंह नरूका, डॉ. प्रीति कुमारी, राकेश कुमार, डॉ. अवनीश कुमार और डॉ. हिमांशु रजक सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए शोधार्थियों को शोध की प्रक्रिया, अकादमिक जिम्मेदारियों और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में गुणवत्तापूर्ण और समाजोपयोगी शोध कर सकें।